नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला इमारत के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत में छात्रों के लिए PG और हॉस्टल संचालित किया जा रहा था। हादसे में अब तक कम से कम 5 छात्रों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने और मलबे में फंसे होने की आशंका है। राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है।
यह हादसा दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन इलाके में हुआ। करीब 50 वर्ष पुरानी बताई जा रही इस इमारत में बेसमेंट के साथ पांच ऊपरी मंजिलें थीं। पुलिस के अनुसार, हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत/निर्माण का काम चल रहा था। इमारत गिरने की वास्तविक वजह की जांच अभी जारी है।
छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सत्य निकेतन दिल्ली का प्रमुख छात्र क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग राज्यों से आए छात्र निजी PG और हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे में इस हादसे ने दिल्ली में निजी PG और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी भवन में अवैध निर्माण, अतिरिक्त मंजिल या नियमों के विपरीत गतिविधियां चल रही थीं, तो संबंधित सरकारी विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
हादसे के बाद छात्र संगठनों ने दिल्ली सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ABVP ने MCD की कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए शहरभर के छात्र PG और हॉस्टलों का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है।
सरकार की ओर से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कार्रवाई हादसे के बाद ही क्यों?
यदि PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए नियमित निरीक्षण, भवन की संरचनात्मक जांच और निर्माण अनुमति की निगरानी पहले से होती, तो क्या इस हादसे को टाला जा सकता था—यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
केवल मालिक नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही जरूरी
इस घटना में केवल भवन मालिक या PG संचालक की जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं होगा। यदि जांच में अवैध निर्माण या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि संबंधित सरकारी अधिकारियों ने भवन की स्थिति की निगरानी क्यों नहीं की।
छात्रों के लिए चल रहे PG और हॉस्टल में Structural Safety Audit, Fire Safety Certificate, Building Approval और अधिकृत मंजिलों की जांच नियमित रूप से होनी चाहिए।
सरकार के सामने अब क्या चुनौती?
दिल्ली सरकार और MCD को इस हादसे से सबक लेते हुए राजधानी के सभी छात्र PG और निजी हॉस्टलों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए। विशेष रूप से पुराने भवनों, बेसमेंट में निर्माण और अतिरिक्त मंजिल वाले भवनों की तत्काल जांच जरूरी है।
सत्य निकेतन का यह हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है। यह उन हजारों छात्रों की सुरक्षा का सवाल है, जो बेहतर शिक्षा और भविष्य की तलाश में दिल्ली आते हैं और निजी PG में रहने को मजबूर होते हैं।
अब जरूरत केवल मुआवजे और जांच की घोषणा की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने और ऐसी घटनाओं को रोकने की स्थायी व्यवस्था बनाने की है।




