पटना, 8 अगस्त 2026।
पटना यूनिवर्सिटी का वार्षिक दीक्षांत समारोह 8 अगस्त 2026 को Patna Women’s College (PWC) के मदर वेरोनिका ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। समारोह में बिहार के राज्यपाल सह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन मौजूद थे। समारोह में 1,305 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जबकि 38 पीजी टॉपर्स को गोल्ड मेडल दिया गया।
लेकिन विद्यार्थियों के लिए उपलब्धि और सम्मान का यह दिन उस समय विवादों में आ गया, जब समारोह के दौरान छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। विरोध के बाद राज्यपाल सैयद अता हसनैन अपना निर्धारित संबोधन दिए बिना समारोह स्थल से चले गए।
मीडिया रिपोर्टों में इस विरोध को सभी विद्यार्थियों को मंच पर डिग्री नहीं दिए जाने से जोड़ा गया है। हालांकि, पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों का कहना है कि उनके विरोध और नाराजगी की वजह इससे कहीं अधिक व्यापक थी। छात्रों के अनुसार, वे खास तौर पर पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों की शपथ कराए जाने, विभाग को नजरअंदाज नहीं किए जाने और विभाग की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल राज्यपाल के सामने रखना चाहते थे।
पत्रकारिता विभाग के छात्रों की मुख्य मांग क्या थी?
पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों के अनुसार, दीक्षांत समारोह में उनके विभाग के विद्यार्थियों को भी अन्य विद्यार्थियों की तरह उचित सम्मान और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था।
छात्रों की मुख्य मांग थी कि पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों की भी शपथ कराई जाए और उन्हें समारोह की प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जाए।
विद्यार्थियों का कहना है कि पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई पूरी करना उनके लिए केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि एक पेशेवर सफर की शुरुआत है। ऐसे में दीक्षांत समारोह में उनके विभाग की भी औपचारिक शपथ कराई जानी चाहिए थी।
राज्यपाल को पत्र लिखकर पहले ही उठाया गया था मामला
पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर बिहार के राज्यपाल सह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति सैयद अता हसनैन को पत्र भी लिखा था।
छात्रों के मुताबिक, इस पत्र के माध्यम से पत्रकारिता विभाग की स्थिति और विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं को राज्यपाल के संज्ञान में लाने की कोशिश की गई थी।
छात्रों का दावा है कि पत्र भेजे जाने के बावजूद अब तक उन्हें किसी प्रकार का जवाब नहीं मिला है।
इसी कारण विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि 8 अगस्त को दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के सामने अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा और विश्वविद्यालय की समस्याओं पर उनका ध्यान जाएगा।
15 जुलाई से 8 अगस्त हुई तारीख, छात्रों ने उठाए सवाल
विद्यार्थियों की नाराजगी का एक और मुद्दा दीक्षांत समारोह की तारीख में बदलाव को लेकर है।
छात्रों के अनुसार, पटना यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह पहले 15 जुलाई 2026 को आयोजित होना था। बाद में इसकी तारीख बदलकर 8 अगस्त 2026 कर दी गई।
विद्यार्थियों का कहना है कि तारीख बदलने की सूचना उन्हें पर्याप्त तरीके से नहीं दी गई। खासकर वे विद्यार्थी जो नौकरी या काम के सिलसिले में पटना से बाहर रहते हैं, उन्हें इस बदलाव के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई विद्यार्थियों के अनुसार, वे अपने काम से छुट्टी लेकर इस खास दिन के लिए पटना पहुंचे थे। तारीख बदलने के कारण उन्हें दोबारा अपनी नौकरी से छुट्टी लेनी पड़ी और पटना आना पड़ा।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि पटना यूनिवर्सिटी के 2026 दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए। विश्वविद्यालय की ओर से 1,305 पीजी विद्यार्थियों को डिग्री दिए जाने की जानकारी समारोह से पहले दी गई थी।
सिर्फ दीक्षांत समारोह नहीं, विभाग की सुविधाओं पर भी सवाल
पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों की नाराजगी केवल दीक्षांत समारोह तक सीमित नहीं है।
छात्रों का कहना है कि पत्रकारिता विभाग में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी है। विद्यार्थियों के अनुसार विभाग में पर्याप्त लैब, लाइब्रेरी और आधुनिक पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
छात्रों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि पत्रकारिता जैसे व्यावहारिक विषय की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अगर पर्याप्त तकनीकी और शैक्षणिक सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, तो वे आधुनिक मीडिया की जरूरतों के अनुरूप खुद को कैसे तैयार करेंगे?
सेंट्रल लाइब्रेरी में भी किताबों की कमी का दावा
विद्यार्थियों का दावा है कि समस्या केवल विभाग की लाइब्रेरी तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि पटना यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी में भी पत्रकारिता और जनसंचार से जुड़ी पर्याप्त किताबें उपलब्ध नहीं हैं।
पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए किताबें, शोध सामग्री, डिजिटल मीडिया से जुड़े संसाधन, स्टूडियो और प्रैक्टिकल लैब जैसी सुविधाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में छात्रों का कहना है कि इन सुविधाओं की कमी सीधे तौर पर उनकी पढ़ाई और भविष्य को प्रभावित करती है।
राज्यपाल के सामने अपनी बात रखना चाहते थे छात्र
छात्रों के अनुसार, दीक्षांत समारोह में उनका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं था। वे चाहते थे कि राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सैयद अता हसनैन उनकी बात सुनें।
विद्यार्थी पत्रकारिता विभाग की शपथ, विभाग में सुविधाओं की कमी, लाइब्रेरी और लैब जैसे मुद्दों को राज्यपाल के सामने रखना चाहते थे।
छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश की तो समारोह का माहौल बिगड़ गया और राज्यपाल कार्यक्रम से चले गए।
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विरोध और नारेबाजी के बीच राज्यपाल ने समारोह स्थल छोड़ दिया और अपना निर्धारित संबोधन नहीं कर सके।
राज्यपाल के जाने के बाद राष्ट्रगान के साथ समाप्त हुआ समारोह

छात्रों के अनुसार, राज्यपाल के समारोह स्थल से चले जाने के बाद कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से राष्ट्रगान के साथ दीक्षांत समारोह समाप्त कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम से विद्यार्थियों में नाराजगी और बढ़ गई। छात्रों का कहना है कि वे दूर-दूर से अपने काम और नौकरी से छुट्टी लेकर अपने जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर में शामिल होने पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि इस दिन उनकी समस्याएं भी सुनी जाएंगी।
लेकिन उनके अनुसार, उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका।
सवाल सिर्फ एक दिन का नहीं है
पटना यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण अवसर होता है। यहां विद्यार्थी वर्षों की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपनी डिग्री प्राप्त करते हैं और अपने करियर की नई शुरुआत करते हैं।
ऐसे में पत्रकारिता विभाग के छात्रों का सवाल केवल 8 अगस्त के समारोह तक सीमित नहीं है।
उनका सवाल है कि अगर विभाग में पर्याप्त लैब नहीं है, लाइब्रेरी में जरूरी किताबें नहीं हैं, सेंट्रल लाइब्रेरी में भी विषय से जुड़े पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और विद्यार्थियों की ओर से भेजे गए पत्रों का जवाब नहीं मिलता, तो उनकी समस्याएं आखिर किसके सामने रखी जाएं?
अब विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब की उम्मीद
दीक्षांत समारोह में हुए घटनाक्रम के बाद पटना यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं।
विद्यार्थी चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन पत्रकारिता विभाग की सुविधाओं को लेकर स्पष्ट जवाब दे। विभाग में लैब और लाइब्रेरी की स्थिति सुधारी जाए। विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों के मुताबिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं और राज्यपाल को भेजे गए पत्र पर भी स्थिति स्पष्ट की जाए।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या विद्यार्थियों की आवाज सुनी जाएगी या फिर दीक्षांत समारोह का विवाद केवल एक दिन की घटना बनकर रह जाएगा?
छात्रों का कहना है कि वे किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं। वे सिर्फ चाहते हैं कि विश्वविद्यालय उन्हें सुने, उनकी समस्याओं को समझे और पत्रकारिता विभाग को भी वह सम्मान और सुविधाएं मिले, जिसकी एक विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण विभाग से अपेक्षा की जाती है।
8 अगस्त का यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल एक दीक्षांत समारोह में हुए विरोध की कहानी नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद की जरूरत को भी सामने लाता है।
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