पटना, 8 मार्च: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2025 के अवसर पर पटना विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो० ज्योति वर्मा, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, पटना विश्वविद्यालय रहीं, जिन्होंने “बिहारी महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य: मुद्दे एवं संभावनाएं” विषय पर अपने विचार रखे।
महिला मानसिक स्वास्थ्य पर मुख्य चिंताएं
प्रो० वर्मा ने अपने व्याख्यान में महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों को रेखांकित किया:
✔ मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी
✔ प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य सेवादाताओं की कमी
✔ कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्थाओं की आवश्यकता
✔ सामाजिक अकेलापन, जातिगत भेदभाव और गरीबी के मानसिक प्रभाव
महिला सशक्तिकरण के लिए सुझाव
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कुछ उपाय भी सुझाए:
✔ कृतज्ञता और संवेदनशीलता विकसित करना
✔ सामुदायिक सेवा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना
✔ महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर उनके अधिकारों को मजबूत करना
कार्यक्रम का संचालन और विशेष उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन डॉ० श्रुति नारायण ने किया। विभागाध्यक्ष डॉ० शिव सागर प्रसाद ने मुख्य अतिथि का सम्मान किया और अध्यक्षीय भाषण में महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना की। अंत में, डॉ० रानी रंजन साह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर डॉ० निरूपा लक्ष्मी, डॉ० संतोष कुमार, डॉ० संजीव कुमार गुप्ता समेत विभागीय कर्मचारी और सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
महिला सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य पर क्यों जरूरी है जागरूकता?
आज भी बिहार समेत पूरे देश में महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार के कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए बेहद जरूरी हैं।
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