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मोतिहारी में फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी कर रहे 10 और शिक्षक बेनकाब, अब तक 24 पर दर्ज हुई FIR

Teacher instructing students in a classroom with natural sunlight and wooden desks in a rural school setting

मोतिहारी, बिहार : पूर्वी चंपारण के मोतिहारी जिले में शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में 10 और शिक्षकों के खिलाफ फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने का मामला सामने आया है, जिससे अब तक कुल 24 फर्जी शिक्षकों पर FIR दर्ज की जा चुकी है। इस कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षकों में हड़कंप मच गया है।

निगरानी विभाग की बड़ी कार्रवाई
बिहार सरकार के आदेश पर निगरानी विभाग द्वारा लगातार फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में कल्याणपुर और चकिया थाना क्षेत्र में 10 फर्जी शिक्षकों की पहचान की गई और उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई। इससे पहले बंजरिया, पीपराकोठी, और तुरकौलिया थाने में 14 शिक्षकों पर भी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने के मामले में FIR दर्ज की गई थी।

निगरानी विभाग के डीएसपी राजेश कुमार के नेतृत्व में की जा रही इस जांच में यह सामने आया कि इन शिक्षकों ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर सरकारी स्कूलों में नियुक्तियां हासिल की थीं। डीएसपी ने बताया कि इन सभी शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता की गहन जांच के बाद पाया गया कि उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी थे।

इन शिक्षकों पर दर्ज हुई FIR
कल्याणपुर थाना क्षेत्र में जिन शिक्षकों पर फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है, उनमें राजकीय प्राथमिक विद्यालय बिशनपुर में कार्यरत रानू पासवान, नव सृजित प्राथमिक विद्यालय बांस घाट की विभा कुमारी, और उत्क्रमित मध्य विद्यालय खरकी कुवां की मनोरमा कुमारी शामिल हैं। वहीं, चकिया थाना में एनपीएस फुलवरिया के शिक्षक जयप्रकाश कुमार यादव, प्राथमिक विद्यालय अहिमन छपरा के अजय राम, उत्क्रमित मध्य विद्यालय अलौला उर्दू के शिक्षक संतोष कुमार महतो और चंद्र लता कुमारी, यूएमएस सिसवा बसंत की सुधा कुमारी, प्राथमिक विद्यालय बंशी बाबा शम्भू चक मठ के संतोष कुमार, और यूएमएस बहुआरा की मुन्ना कुमारी के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है।

हाई कोर्ट के आदेश पर हो रही है जांच
निगरानी विभाग की यह कार्रवाई पटना हाई कोर्ट के आदेश पर हो रही है, जिसमें राज्यभर के शिक्षकों की शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है। इस मामले में फर्जी पाए गए शिक्षकों पर कानूनी कार्रवाई तो तय है ही, साथ ही उन्हें अब तक दिए गए वेतन की भी वसूली की जाएगी।

शिक्षकों में मचा हड़कंप
इस मामले के सामने आने के बाद जिले के अन्य शिक्षकों में दहशत का माहौल है। निगरानी विभाग की लगातार कार्रवाई और जांच से जिले के कई अन्य शिक्षकों पर भी गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में शिक्षकों के बीच अफरातफरी का माहौल है, और वे अब अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवालों के घेरे में आ गए हैं।

फर्जी शिक्षकों के खिलाफ सख्त रुख
बिहार में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ सरकार का रुख सख्त होता जा रहा है। शिक्षा विभाग और निगरानी विभाग के संयुक्त प्रयासों से ऐसी नियुक्तियों पर नकेल कसी जा रही है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि योग्य उम्मीदवार ही सरकारी शिक्षण संस्थानों में सेवाएं दें। फर्जी शिक्षकों के खिलाफ की जा रही यह कार्रवाई बिहार सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य के विभिन्न विभागों में हो रही अनियमितताओं को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

भविष्य में हो सकती है और कार्रवाई
निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह जांच अब भी जारी है और आने वाले दिनों में और भी फर्जी शिक्षकों के नाम सामने आ सकते हैं। सरकार इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करने का दावा कर रही है, ताकि बिहार के शैक्षणिक संस्थानों की साख पर कोई सवाल न उठे।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
फर्जी शिक्षकों के मामले ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति से न केवल छात्रों के भविष्य पर असर पड़ता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। राज्य सरकार अब इस दिशा में सख्त कदम उठाने की तैयारी में है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्रोत : निगरानी विभाग, मीडिया रिपोर्ट्स

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