पटना: बिहार की सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शुमार पटना यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह पढ़ाई-लिखाई नहीं, बल्कि बमबाजी और हिंसा है। दरभंगा हाउस कैंपस में छात्रों के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई, जो धीरे-धीरे पत्थरबाजी और फिर बमबाजी में बदल गई। इस घटना के बाद पूरे कैंपस में अफरा-तफरी मच गई।
कब और कैसे हुई घटना?
यह घटना बुधवार दोपहर करीब 12:40 बजे की बताई जा रही है, जब पटना यूनिवर्सिटी के दरभंगा हाउस में छात्र गुटों के बीच पोस्टरबाजी और प्रचार को लेकर विवाद हुआ। बात इतनी बढ़ी कि हाथापाई शुरू हो गई और फिर दरभंगा हाउस की दीवार पर देसी बम फेंका गया। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास का इलाका कांप उठा।
पुलिस मौके पर पहुंची, जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही यूनिवर्सिटी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। पार्किंग में खड़ी कुछ गाड़ियां भी इस बम धमाके की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गईं। पुलिस फिलहाल CCTV फुटेज खंगाल रही है, ताकि दोषियों की पहचान की जा सके।
चुनावी माहौल में बढ़ा तनाव
पटना यूनिवर्सिटी में इस समय छात्र संघ चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। चुनाव की तारीख का ऐलान होते ही कैंपस का माहौल गर्म हो गया है। हर संगठन अपनी ताकत दिखाने में जुटा है। ऐसे में इस बमबाजी को चुनावी हिंसा से जोड़कर देखा जा रहा है।
पटना यूनिवर्सिटी: जहां राजनीति की नर्सरी से निकलते हैं बड़े नेता
पटना यूनिवर्सिटी का इतिहास सिर्फ पढ़ाई-लिखाई तक सीमित नहीं है। यह यूनिवर्सिटी बिहार की सियासत की प्रयोगशाला मानी जाती है। लालू यादव से लेकर सुशील मोदी, रविशंकर प्रसाद और आनंद मोहन तक, कई बड़े नाम इसी कैंपस की छात्र राजनीति से निकले हैं।
छात्र संघ चुनाव: विवादों और हिंसा का इतिहास
| वर्ष | विजेता | संगठन |
|---|---|---|
| 1970 | लालू प्रसाद यादव | AISF |
| 1973 | सुशील कुमार मोदी | ABVP |
| 1992 | राजेश यादव | छात्र राजद |
| 2007 | अभिषेक यादव | छात्र राजद |
| 2012 | संजीव मिश्रा | ABVP |
| 2019 | मनीष यादव | JACP |
| 2022 | आनंद मोहन | JDU |
दरभंगा हाउस: जहां पोस्टर से लेकर बमबाजी तक सब चलता है
दरभंगा हाउस पटना यूनिवर्सिटी का वह ऐतिहासिक परिसर है, जहां छात्रसंघ चुनाव के दौरान दीवारों पर पोस्टर चिपकाना और नारेबाजी करना आम बात है। इसी जगह सबसे ज्यादा हिंसा और झड़प होती है। 2025 के चुनाव से पहले इसी दरभंगा हाउस में फिर से बमबाजी हुई, जिसने छात्रों में दहशत भर दी।
पुलिस की जांच: किस पर है शक की सुई?
- CCTV कैमरे खंगाले जा रहे हैं।
- पूर्व और मौजूदा छात्रनेताओं से पूछताछ।
- चुनाव में खड़े उम्मीदवारों पर भी नजर।
- बाहरी तत्वों की संलिप्तता की जांच।
पुलिस के अनुसार:
“हमारे पास कुछ फुटेज मिले हैं, जिसमें संदिग्ध गतिविधियां दिख रही हैं। हम एक-एक कर सबकी पहचान कर रहे हैं। किसी भी सूरत में हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
चुनावी माहौल में डर का साया
पटना यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है। हर संगठन ताकत झोंक रहा है। ABVP, AISA, छात्र राजद, छात्र जदयू और NSUI सभी अपने-अपने बैनर-पोस्टर के साथ मौजूद हैं। ऐसे में बमबाजी की घटना ने चुनाव को और खूनी मोड़ पर ला दिया है।
छात्रों की राय: पढ़ाई कम, राजनीति ज्यादा
पटना यूनिवर्सिटी के छात्र अब खुलकर कहते हैं कि यहां पढ़ाई से ज्यादा राजनीति हावी है। एक छात्र ने कहा:
“हर चुनाव में बमबाजी और मारपीट होती है। इस बार भी वही हो रहा है। हमें डर है कि कहीं क्लासेज पर भी असर ना पड़े।”
पटना यूनिवर्सिटी क्यों बन चुकी है बारूद का ढेर?
- बाहरी नेताओं की दखलअंदाजी
- संगठनों के बीच पुरानी दुश्मनी
- पुलिस की लापरवाही और सख्ती की कमी
- राजनीति में छात्रसंघ की सीढ़ी बनने की होड़
क्या इस बार शांतिपूर्ण होगा चुनाव?
पिछले कई चुनावों की तरह 2025 का चुनाव भी अब हिंसा और बमबाजी की छाया में आ गया है। चुनाव आयोग, प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन के लिए यह बड़ी चुनौती है कि कैसे चुनाव को शांतिपूर्ण कराया जाए।
आगे क्या होगा?
- पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी
- कैंपस में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती
- छात्र संगठनों के नेताओं की काउंसलिंग
- बाहरी तत्वों पर प्रतिबंध
निष्कर्ष
पटना यूनिवर्सिटी एक बार फिर राजनीतिक युद्ध का मैदान बन चुकी है। बमबाजी की घटना न केवल छात्रों में डर पैदा कर रही है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में भी बड़ी हलचल मचा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार का चुनाव हिंसा और खून-खराबे के बिना पूरा हो पाएगा या नहीं।
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